विशेष लेख
(भारत भूषण कुकरेती एवं सजंय बडोला)

 

प्रेस क्लब मुनि की रेती के तत्वाधान में हिंदी दिवस से पूर्व निकले विचार गोष्ठी में प्राप्त आपसी संवाद से निकले अमृत का एकस्वर में स्वीकार किया गया कि अगर हिंदी का उत्थान करना है तो सबसे पहले हर बोली, भाषा, रहन सहन, परम्परा, सँस्कृति, रीति रिवाज आदि को अपनाना जरूरी है तभी हम विश्व को अपनी बोली, भाषा से परिचित करा कर उनके महत्वों को समझा पाएंगे।इस गोष्ठी में अनेक बोली, भाषा के विद्वान जन की उपस्थिति सहित श्री देव सुमन विश्वविद्यालय के प्रो.अधीर रंजन ने बेवाक अपनी बोली भाषा के उन्नयन की बात कर अगर हिंदी को वैश्विक पहचान बनाना है तो अंहकार को त्यागना जरूरी है।
इस विचार गोष्ठी पर प्रेस क्लब ने उपयोगी और जरूरी भाषा मर्मज्ञों को बुलाकर एक सन्देश देने का कार्य किया कि भीड़ नही हिंदी पहचान बने और इसके स्वरूप को सर्व मान्यता मिले।अँग्रेजी भाषा के नाम पर विकास और गर्व का अनुभव करना उचित नही है हिंदी शब्द कोष बहुत व्यापक है जिनका आप अंग्रेजी में अनुवाद नही कर पाएंगे।इसलिये उचित समय है, सही समय है कि घर घर मे अपनी बोली, सभ्यता, सँस्कार सहित हिंदी को बोलना, लिखना चाहिए तो फिर स्वत ही हिन्दी की बिंदी विश्व के मस्तिक पर आरूढ़ होगी और इसको पहचान अवश्य मिलेगी जिसकी हम दिन रात चाहना रखते है।हिंदी को राजभाषा हिंदी मूल के लोगो नेशुरू नही की बल्कि दक्षिण और पश्चिम के लोगो ने हिंदी को जन जन में अपनाने की बात की।सर्वमान्य महात्मा गांधी, रविन्दनाथ टैगोर आदि ने इसकी शुरुवात की बाद में हिंदी मूल के लोगो ने इसमें अपनी भूमिका को जोड़ने का कार्य किया है।
एक बेहत्तर जन संवाद और भाषा विज्ञान के धुरंदर जन से प्राप्त बिंदुओं को उल्लेखित करना प्रेस क्लब के फर्ज ओर हिंदी राजभाषा बने उसके लिये एक आहुति है।इस गोष्ठी में प्राप्त मंथन में बिना आडम्बर के हर बोली का सम्मान करना और उसको बोलने लिखने में हिचकने के बजाय गर्व महसूस होना चाहिए।रूस , चाइना, जर्मन, जापान आदि जो अंग्रेजी भाषा के बजाय अपनी प्रचलित बोली में कार्य कर विश्व मे अपनी अमित पहचान बनाने में कामयाब है।लेकिन भारतीय इंग्लैंड की थोपी भाषा अंग्रेजी को बोलकर गर्व महसूस क्यों करता है इस ओर जरूर चर्चा होनी चाहिए जब अपनी बोली , भाषा को हम अपनो के बीच नही बोलेंगे ओर अँग्रेजी बोलकर गर्व का अनुभव करेंगे तो फिर उसके परिणाम ईसी रूप में धरातल पर दिखेंगे।आज के परिवेश में घर से ही अपनी हर पहचान को अपने लोगो को बताने बोलने और लिखने को कहे ।परिवर्तन के नाम पर हम अपनी चिठ्ठी , पत्री को भूल गए है और उसका स्थान मोबाइल फोन ने ले लिया है तत्काल आप उस ओर क्षण भर में विश्व भर से सम्पर्क स्थापित कर बातचीत, कुशल क्षेम जान सकते है।बच्चे ऑन लाईन क्लास के नाम पर लैपटॉप ओर मोबाइल फोन से ग्रसित हो गए है वो उसमें क्या कर रहे है, क्या देख रहे है, कितने देर तक उसमें लिप्त है जिससे उनका मानसिक ओर शाररिक विकास अवरुध्द हो गया है।यही कमोवेश स्थिति अपने खान पान ,रीति रिवाज की हो गयी है जिनको आज का भविष्य स्वीकार ना कर कोल्ड ड्रिंक, पिज्जा, बर्गर, न्यूडल, मोमो ओर बेकरी से निर्मित भोज का प्रयोग कर अपने स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे है।जबकि अपनी परम्परा में बने स्वादिष्ट भोजन शरीर के लिये लाभदायक है उनसे भविष्य को जरूर जोड़ने का कार्य करे।अगर अंहकार के बल पर हम अपना आधिपत्य स्थापित करने की कोशिश करेंगे तो लाभ नही नुकसान की संभावना ज्यादा है।अनेकता में एकता का समावेश, अनेक विविधताओं का राष्ट्र अपना अमृत का खजाना है जँहा हम किसी दूसरे से कम नही की भावना अंहकार को त्यागकर होनी चाहिए तो बोली भाषा स्वयं खुशबू की तरह फैलकर हमारे भावों को कामयाबी में बदल कर अपना वैश्विक स्तर पर रंग छोड़ने का कार्य करेगी वैसे भी आज योग और अपनी भाषा हिंदी का बढ़ता प्रयोग हमे सकून देता है और इसके जोरदार ढंग से महन्त मनोज प्रपन्नाचार्य ओर विनोद द्विवेदी ने अपने सम्बोधन से जनसमूह को अपने हिंदी के महत्व से अवगत कराने का कार्य किया।
राजभाषा दिवस पर आयोजित विचार गोष्ठी बहुत सारगर्भित सहित अपने उद्देश्यों में सफल रही है हिंदी अवश्य राष्ट्र की मातृ भाषा बनेगी लेकिन सियासत इसमें बाधा बनी है जिस दिन राजनीतिक परिपक्वता का उदय होगा उसी दिन राज्यभाषा हिंदी का नवोदित उदयकाल होगा जो विश्व पर कब्जा कर अपनी पताका फहराने का कार्य करेगी। इस विचार मंथन में प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सूर्यचन्द्र सिंह चौहान, डॉक्टर विश्वम्भरी भट्ट ,जगदम्बा कण्डारी, सतेंद्र चौहान,रामकृष्ण पोखरियाल,डॉक्टर रश्मि पैन्यूली, महेश चित्कारिया, भगत राम बिजल्वाण, अशोक क्रेजी, विशालामणी पैन्यूली,आवाज संस्था के अध्यक्ष अशोक क्रेजी, नगर पालिका अध्यक्षा नीलम बिजल्वाण, विनोद बिजल्वाण सहित प्रो.अधीर कुमार ने हिंदी विषय मे अपना सम्बोधन कर आंख, नाक, कान खोलने का कार्य कर कई नई जानकारियां प्रदान की।कुल मिलाकर गोष्ठी बहुत सफल और अपने मूल स्वरूप से जनता को अवगत कराने में सफल रही है।प्रेस क्लब के अध्यक्ष सजंय बडोला, उपाध्यक्ष भारत भूषण कुकरेती, सुदीप पँचभैय्या जिन्होंने मंच का सफल संचालन किया, महासचिव आशीष लखेड़ा,विधिक सलाहकार रमाबल्लभ भट्ट, कोषाध्यक्ष धनीराम बिंजोला, नवीन चंद्रा, आशीष कुकरेती सहित अनेक प्रबुध्दजनो की मौजूदगी रही है।
आज विघ्नहर्ता भगवान गणपति का प्रकटोत्सव की आप सभी को शुभकामनाये ओर बधाई भगवान गणेश आपकी रिद्धि, सिध्दि, शुभ , लाभ प्रदान कर आरोग्यता का ज्ञान दे।

प्रस्तुति – नवीन चंद्रा

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