मुनि की रेती। हंस फाउंडेशन से जुड़े शूरवीर सिंह रावत उर्फ स्वामी प्रसन्नानंद प्रवचन कार्यक्रम के सिलसिले में मुनि की रेती पहुंचे। इस दौरान उन्होंने नगर पालिका मुनि की रेती कार्यालय में पालिकाध्यक्ष नीलम बिजल्वाण से शिष्टाचार भेंट की। आत्मीय मुलाकात के दौरान रवांई की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और पहाड़ी उत्पादों की विशेषताओं पर चर्चा हुई।
स्वामी प्रसन्नानंद ने अपनी पारंपरिक संस्कृति और पहाड़ी खान-पान की पहचान माने जाने वाले लाल चावल, मडुवे का आटा और अखरोट पालिकाध्यक्ष नीलम बिजल्वाण को भेंट किए। पहाड़ की मिट्टी से जुड़े इन पारंपरिक उत्पादों के माध्यम से उन्होंने रवांई की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय खान-पान की समृद्ध परंपरा की झलक प्रस्तुत की।
मुलाकात के दौरान स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति को संरक्षित रखने के महत्व पर भी विचार-विमर्श हुआ। पहाड़ी अनाज और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में ऐसी पहल को महत्वपूर्ण बताया गया।
इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष नीलम बिजल्वाण ने कहा कि रवांई की संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और पहाड़ी उत्पाद हमारी समृद्ध विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। पारंपरिक अनाज और स्थानीय उत्पाद न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का भी कार्य करते हैं।
पालिकाध्यक्ष ने स्वामी प्रसन्नानंद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की आत्मीय मुलाकातें उत्तराखंड की विविध लोक संस्कृतियों और परंपराओं को एक-दूसरे से जोड़ने का माध्यम बनती हैं। साथ ही, प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने में भी सहायक होती हैं।
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