हरिद्वार | NEWS DEKHO INDIA
धर्मनगरी हरिद्वार में गंगनहर की वार्षिक बंदी का असर हर की पौड़ी पर दिखाई देने लगा है। गंगा स्नान की आस्था लेकर हरिद्वार पहुंचे श्रद्धालुओं को घाट पर पर्याप्त पानी नहीं मिलने से निराशा का सामना करना पड़ रहा है। ऊपरी गंगनहर को सफाई और मरम्मत कार्यों के लिए 18 दिनों तक बंद किया गया है।
20 अक्टूबर की मध्यरात्रि से बंद हुआ जल प्रवाह
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऊपरी गंगनहर में 20 और 21 अक्टूबर की मध्यरात्रि से जल प्रवाह रोका गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 7 नवंबर की मध्यरात्रि को नहर में दोबारा पानी छोड़े जाने और 8 नवंबर की सुबह से जल प्रवाह सुचारु होने की संभावना है। तब तक हर की पौड़ी पर गंगाजल की उपलब्धता प्रभावित रह सकती है।
सफाई और मरम्मत के साथ अर्धकुंभ की तैयारियां
गंगनहर की वार्षिक बंदी के दौरान नहर में जमा गाद और कचरे की सफाई की जाती है। इसके अलावा नहर की दीवारों, पुलों और अन्य संरचनाओं की मरम्मत व रखरखाव के कार्य किए जाते हैं। हरिद्वार में आगामी अर्धकुंभ की तैयारियों के मद्देनजर घाटों के विकास और निर्माण कार्यों को भी गति दी जा रही है।
श्रद्धालुओं और व्यापारियों पर असर
हर की पौड़ी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन नहर में पानी का प्रवाह बंद होने से स्नान की इच्छा लेकर आए श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। वहीं, श्रद्धालुओं की संख्या में संभावित कमी से घाटों के आसपास कारोबार करने वाले व्यापारियों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर पर भी पड़ सकता है असर
ऊपरी गंगनहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सिंचाई तथा दिल्ली-एनसीआर के कुछ क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत है। नहर बंद रहने के दौरान इन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। संबंधित विभागों की ओर से जल प्रबंधन और आवश्यक रखरखाव के कार्य किए जा रहे हैं।
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