देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ों में तेजी से बढ़ते पलायन, सूने होते गांवों और अपनों के इंतजार में जिंदगी गुजार रहे बुजुर्गों का दर्द अब बड़े पर्दे पर देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार विनोद कापड़ी की बहुचर्चित फिल्म ‘पायर (PYRE)’ 30 अक्टूबर 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।
हिमालय की खूबसूरत वादियों में फिल्माई गई यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पहाड़ की उस हकीकत को सामने लाने का प्रयास है, जहां बेहतर रोजगार और भविष्य की तलाश में युवा अपने गांव और बुजुर्ग माता-पिता को पीछे छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
बुजुर्ग दंपती के इर्द-गिर्द घूमती है कहानी
फिल्म की कहानी उत्तराखंड के एक दूरस्थ पहाड़ी गांव में रहने वाले बुजुर्ग दंपती के जीवन पर आधारित है। उनके बच्चे बेहतर भविष्य की तलाश में गांव छोड़ चुके हैं। पीछे रह गए माता-पिता की जिंदगी अब घर, पुरानी यादों और अपनों के लौटने के इंतजार के बीच सिमटकर रह गई है।
आम पहाड़ी लोगों ने निभाए हैं मुख्य किरदार
फिल्म की खास बात यह है कि इसमें पेशेवर बॉलीवुड कलाकारों के बजाय उत्तराखंड के स्थानीय निवासी पदम सिंह कापड़ी और हीरा देवी मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। दोनों के स्वाभाविक अभिनय ने फिल्म की कहानी को और भी वास्तविक बनाया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिली पहचान
फिल्मकार विनोद कापड़ी की इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी सराहना मिली है। रिलीज से पहले फिल्म को 18 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की खबर सामने आई थी।
‘पायर’ एक फिल्म से बढ़कर पहाड़ की सामाजिक हकीकत का आईना है। यह उन खाली होते गांवों, अकेले पड़ते बुजुर्गों और टूटते पारिवारिक रिश्तों की कहानी है, जिस पर समाज को गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
