असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी, बच्चे की प्रथम गुरु मां : डॉ. विजय धस्माना
मुनि की रेती। जीवन में असफल होना भी सफलता की राह का महत्वपूर्ण हिस्सा है। असफलताओं से ही व्यक्ति सीखता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त करता है। बच्चे की प्रथम पाठशाला उसका घर और प्रथम गुरु उसकी मां होती है। यह बात हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने तीर्थ चेतना के 11वें स्थापना दिवस पर आयोजित उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्य संबोधन के दौरान कही।
डॉ. धस्माना ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कक्षा आठ तक बच्चों को अनुत्तीर्ण न करने की व्यवस्था कहीं न कहीं उनकी वास्तविक सीखने की प्रक्रिया और चुनौतियों से जूझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल अगली कक्षा में पहुंचाना नहीं, बल्कि बच्चों का शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा में बदलाव तभी सार्थक है, जब वह बच्चों के बेहतर भविष्य का निर्माण करे।
उन्होंने पुराने हिंदी पाठ्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनमें जीवन मूल्यों, संस्कारों और व्यवहारिक शिक्षा को विशेष महत्व दिया जाता था। उन्होंने पुराने पाठ्यक्रमों की पुस्तकों का संग्रहालय भी तैयार किया है, जिनसे आज भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और अभिभावक दोनों की जिम्मेदारी है कि बच्चों की जिज्ञासाओं का सही समाधान करें। आज इंटरनेट और गूगल पर ज्ञान की अपार सामग्री उपलब्ध है, लेकिन सोशल मीडिया पर भ्रामक और निरर्थक सामग्री भी बड़ी मात्रा में मौजूद है। ऐसे में बच्चों को सही और गलत के बीच अंतर समझाना बेहद जरूरी है।
डॉ. धस्माना ने मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप में व्यस्त रहने से बच्चों की दिनचर्या, नींद और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अनुशासित दिनचर्या, सकारात्मक सोच और जीवन मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने समाज में बढ़ते विभाजनकारी दृष्टिकोण पर भी चिंता व्यक्त करते हुए चेतना को जागृत करने और सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया।
शिक्षक समाज को दिशा देने वाला महत्वपूर्ण स्तंभ : प्रो. मधु थपलियाल
समारोह की मुख्य वक्ता प्रो. मधु थपलियाल ने कहा कि पत्रकार और शिक्षक दोनों समाज को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। पत्रकार अपनी कलम से और शिक्षक अपने ज्ञान से समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। ज्ञान का प्रकाश अज्ञान के अंधकार को समाप्त करता है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के लिए प्रत्येक विद्यार्थी समान महत्व रखता है। कक्षा में यदि केवल एक विद्यार्थी भी उपस्थित हो, तो शिक्षक को पूरे समर्पण से उसे शिक्षा देनी चाहिए। उन्होंने शिक्षक को निरंतर अध्ययनशील और विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया।
शिक्षक और पत्रकारिता दोनों की समाज में अहम भूमिका : बच्चन पोखरियाल
नगर के प्रतिष्ठित समाजसेवी बच्चन पोखरियाल ने कहा कि शिक्षक ज्ञान, पत्रकार सत्य और निर्भीकता तथा समाज अनुशासन और शुचिता का प्रतीक है। एक शिक्षक जीवनभर बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण में जुटा रहता है। उन्होंने तीर्थ चेतना के संपादक सुदीप पंचभैया की पत्रकारिता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी निष्पक्षता, ईमानदारी और समर्पण लंबे समय से उन्हें प्रभावित करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक सम्मान से सम्मानित शिक्षकों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
शिक्षा और पत्रकारिता के अनुभव साझा किए
राज्य आंदोलनकारी परिषद की पूर्व उपाध्यक्ष उषा रावत ने अपने संबोधन में शिक्षक और पत्रकारिता जगत से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने दिवंगत पति रणजीत रावत के शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक की चुनौतियों को नजदीक से समझने का अवसर मिला है। साथ ही समाचार पत्र के प्रकाशन से जुड़े अनुभवों ने पत्रकारिता के संघर्ष और जिम्मेदारियों से भी परिचित कराया है। उन्होंने प्रेस क्लब मुनि की रेती के सदस्यों की निर्भीक, निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता की सराहना की।
सत्य और निष्पक्ष पत्रकारिता समाज की जरूरत : नीलम बिजल्वाण
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं नगर पालिका अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण ने तीर्थ चेतना की 11वीं वर्षगांठ पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पत्रकारिता का दायित्व समाज को सही आईना दिखाना है। सुदीप पंचभैया और प्रेस क्लब के सदस्य सत्य को सामने लाने तथा गलत के विरुद्ध आवाज उठाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सभी अतिथियों और आयोजन से जुड़े लोगों का आभार व्यक्त किया।
11 वर्षों में शिक्षकों का मजबूत नेटवर्क बना तीर्थ चेतना : सुदीप पंचभैया
तीर्थ चेतना के संपादक सुदीप पंचभैया ने अपने पत्रकारिता के सफर और समाचार पत्र की स्थापना से जुड़े संघर्षों को साझा किया। उन्होंने कहा कि एक समाचार पत्र की नौकरी छोड़कर अपना प्रकाशन शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन कुछ अलग करने और विशिष्ट पहचान बनाने के उद्देश्य से तीर्थ चेतना की शुरुआत की गई। आज तीर्थ चेतना शिक्षकों का एक मजबूत नेटवर्क बन चुका है और इसके लगभग 85 प्रतिशत पाठक शिक्षक हैं।
उन्होंने सभी अतिथियों, शुभचिंतकों, प्रेस क्लब सदस्यों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में दिनेश व्यास, प्रकाश बहुगुणा, सतीश जोशी, जगदम्बा कंडारी, डॉ. तनु मित्तल और तीर्थ चेतना के सचिव राजेश रावत सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे।
22 शिक्षकों को उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान
समारोह में प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा वर्ग के कुल 22 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
प्रारंभिक वर्ग में जगदम्बा कंडारी, स्नेहलता ध्यानी, लक्ष्मी भद्री, रीता राणा और विनोद बिजल्वाण को सम्मानित किया गया।
माध्यमिक वर्ग में सतीश जोशी, विनोद द्विवेदी, विनय रावत, अनिता बौंथियाल और विमल कोटियाल को सम्मान मिला।
उच्च शिक्षा वर्ग में प्रो. कल्पना पंत, डॉ. तनु मित्तल, डॉ. रेणु गौतम, डॉ. किशोर चौहान, डॉ. संगीता बिजल्वाण जोशी, डॉ. नीलम ध्यानी और डॉ. तनु बाली को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सभी अतिथियों को उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी टोपी, बैज और यमुनोत्री, गंगोत्री, बाबा केदारनाथ एवं बद्रीनाथ धाम के स्मृति चिह्न भेंट किए गए। आयोजन में पहाड़ी टोपी पहनाना भी आकर्षण और चर्चा का विषय रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मंगल गीत के साथ हुआ। इंदु बाला गौड़ और बृजमोहन गौड़ ने अपना स्वयं रचित काव्य संग्रह सुदीप पंचभैया को भेंट किया। प्रेस क्लब मुनि की रेती की ओर से भी उन्हें स्मृति चिह्न और धार्मिक पुस्तक देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रमाबल्लभ भट्ट अस्वस्थता के कारण समारोह में उपस्थित नहीं हो सके। प्रेस क्लब की ओर से उन्हें शुभकामनाएं एवं स्मृति चिह्न भेंट किया गया। उपस्थित लोगों ने मां गंगा से उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
समारोह का संचालन विश्वेश्वरी भट्ट एवं श्रीमती बिजल्वाण ने संयुक्त रूप से किया। आयोजन में नगर के गणमान्य नागरिकों, शिक्षकों और पत्रकारों की उपस्थिति रही।
